रीको व प्रशासन के अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप

Jaipur.
जयपुर-दिल्ली एक्सप्रेस हाइवे पर बढ़ारणा इण्डस्ट्रिज एरिया के पार्क की 1500 वर्ग गज बेशकीमती जमीन पर रविवार को रातों-रात अवैध निर्माण हो गया। प्राइम लोकेशन वाली इस जमीन की कीमत करीब 20 करोड़ रुपए बताई जा रही है। पार्क के भूखंड पर एक ही रात में 10 फीट ऊंची चारदीवारी बना कर एक्सप्रेस हाइवे पर खुलता हुए लोहे का गेट लगा दिया। अब अवैध तरीके से बिजली का कनेक्शन लेने की प्रक्रिया चल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस भूखंड पर कब्जा करने के लिए पिछले गुरुवार को ईंट, बजरी व पत्थर डाले गए थे। इसको लेकर विश्वकर्मा स्थित रीको कार्यालय के उच्च अधिकारियों को सूचना भी दे दी थी। लेकिन तीन दिन तक मामले को दबाए रखा और रविवार को छुट्टी के दिन 100 कारीगर व मजदूर लगा कर रीको पार्क की जमीन पर कब्जा कर लिया। अब न्यायालय से स्टे लेकर स्थायी रूप से कब्जा को वैध करने की कोशिश की जा रही है। इसमें रीको व प्रशासन के अधिकारियों की मिलीगत है। इससे सरकारी भूमि को खुर्दबुर्द किया जा रहा है।

राजस्व अधिकारियों की गलती :
विश्वकर्मा रीको के जनरल मैनेजर शैलेंद्र का कहना है कि राजस्व अधिकारियों (तहसीलदार-पटवारी) की गलती के कारण यह कंफ्यूजन हो रहा है। रीको ने 25 साल पहले जमीन अवाप्त कर ली थी और मौके पर पार्क भी बना दिया। लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में खातेदारों का नाम ही बोल रहा है और रजिस्ट्री हो रही है। इस वजह से कुछ लोगों ने खसरा नं. 931 और 927 की भूमि पर कब्जा कर लिया। हमने कब्जा हटवाने के लिए पुलिस से इमदाद भी मांगी है। जल्दी ही अवैध निर्माण हो हटाया जाएगा।
मिलीभगत का अंदेशा ?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जेडीए व पीडब्ल्यूडी ने 25 साल पहले खातेदारों से जमीन अवाप्त कर ली थी। लेकिन तहसीलदार व पटवारियों से मिलीभगत करके कुछ खातेदारों ने जमाबंदी में अपना नाम रहने दिया और अवाप्ति का क्षेत्रफल कम ज्यादा करवा दिया। ताकि हाइवे पर उनकी जमीन रह सके। यहां रीको ने 20 साल पहले पार्क भी बना दिया। लेकिन रीको के अधिकारियों व प्रशासन से मिलीभगत कर कुछ लोग कब्जा करते रहते है। इसकी उच्च स्तरीय कमेटी से जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही रीको को यहां काम रूकवा कर गार्ड बैठाना चाहिए। अन्यथा यहां पर भूमाफियों का गिरोह सक्रिय हो जाएगा।

